गुरुवार 5 मार्च 2026 - 15:53
नजफ़ अशरफ़; हिन्दुस्तानी दीनी छात्रों द्वारा रहबर ए मुअज़्ज़म की शहादत पर शोक संवेदना और मजलिस का आयोजन

हौज़ा / हौजा ए इल्मिया नजफ़ अशरफ़ (इराक) में मुक़ीम हिन्दुस्तानी दीनी छात्रों ने रहबर ए मुअज़्ज़म हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की शहादत पर उनके दफ़्तर में हाज़िर होकर गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार किया और वहाँ मौजूद ज़िम्मेदारान व अहलकारों की ख़िदमत में तअज़ियत व पुरसा पेश किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौजा ए इल्मिया नजफ़ अशरफ़ (इराक) में मुक़ीम हिन्दुस्तानी दीनी छात्रों ने रहबर ए मुअज़्ज़म हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की शहादत पर उनके दफ़्तर में हाज़िर होकर गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार किया और वहाँ मौजूद ज़िम्मेदारान व अहलकारों की ख़िदमत में तअज़ियत व पुरसा पेश किया।

इस मौक़े पर हिन्दुस्तानी तालिब इल्मों ने रहबर ए मुअज़्ज़म की इल्मी, इंक़ेलाबी और बसीरत अफ़रोज़ ख़िदमात को ख़िराज ए अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि आपने पूरी उम्मत ए मुस्लिम खास तौर पर मज़लूमों की रहबरी करते हुए इस्तिकबार ए आलमी के मुक़ाबले में इस्तिक़ामत और शुजात की मिसाल क़ायम की।

दीनी छात्रों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रहबर ए मुअज़्ज़म की शहादत उम्मत ए मुस्लिम के लिए एक बड़ी सानिहा है, लेकिन उनकी फ़िक्र, पैग़ाम और मुक़ावमत का रास्ता हमेशा ज़िंदा रहेगा।

उन्होंने अहद किया कि वे शहीद रहबर के अफ़कार-ओ-नज़रियात को आगे बढ़ाते हुए उम्मत ए मुस्लिमा के इत्तिहाद और बेदारी के लिए अपनी इल्मी व दीनी ज़िम्मेदारियाँ अदा करते रहेंगे।

इस मौक़े पर शहीद रहबर ए इंक़ेलाब के बुलंद दरजात और उम्मत ए मुस्लिम के इत्तिहाद व सरबुलंदी के लिए दुआ भी की गई।

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